April 24, 2024

Ajayshri Times

सामाजिक सरोकारों की एक पहल

World Password Day 2023: हर साल मई के पहले गुरुवार को “8विश्व पासवर्ड दिवस” के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष विश्व पासवर्ड दिवस 2023 में 4 मई को मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य अपने पासवर्ड के प्रति लोगों में जागरुकता फैलाना है। पासवर्ड हमारी डिजिटल दुनिया के पहरेदार होते हैं और हमको ऑनलाइन बैंकिंग, शॉपिंग से लेकर सोशल साइट्स जैसी कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने में सुरक्षा प्रदान करते हैं। विश्व पासवर्ड दिवस की ऑफिशियल वेबसाइट https://passwordday.org/ पर जाकर आप अपनी पासवर्ड हैबिट्स को बेटर बना सकते हैं।

 

बहुत से लोग अपने महत्वपूर्ण खातों के लिए multi-factor authentication को भी टर्न ऑन करते हैं। इस दिवस को मनाने की शुरुआत के बारे में बात की जाए तो सिक्योरिटी रिसर्चर मार्क बर्नेट ने 2005 में आयी अपनी किताब Perfect Passwords के माध्यम से सबसे पहले लोगों को पासवर्ड से संबंधित दिवस मनाने के लिए प्रेरित किया था। इसी विचार से प्रभावित होकर Intel Security ने पहल करते हुए 2013 में मई के पहले गुरुवार को विश्व पासवर्ड दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की।

आज “पासवर्ड” शब्द सुनते ही मन में कई तरह के शब्द और सिंबल्स दिमाग में घूमने लगते हैं लेकिन पासवर्ड्स का उपयोग केवल इसी रूप में नहीं होता रहा है। पासवर्ड्स तब से यूज हो रहे हैं जब से मनुष्य के मन में कुछ “गुप्त” रखने की इच्छा जगी है। इसके अलावा युद्धों में तो इनका प्रयोग बहुत पुराना है। पश्चिमी सभ्यता के लोगों की बात करें तो बाइबिल के Book of Judges के बारहवें अध्याय में “shibboleth incident” का जिक्र आता है।

इसमें Gilead और Ephraim नामक दो कबीलों के बीच हुए युद्ध के दौरान Gilead के सैनिकों ने अपने दुश्मनों को पहचानने के लिए “shibboleth” शब्द का उपयोग किया था। इसके पीछे उनका तर्क था कि Ephraimites इस शब्द का उच्चारण अपनी बोली में कुछ अलग तरह से करेंगे और पकड़े जाएँगे। जिस व्यक्ति के Ephraim से जुड़े होने का शक उन्हें होता था, वे उससे ये “shibboleth” शब्द बुलवाते थे और यदि वह संदिग्ध Ephraimite इसका उच्चारण “sibboleth” कर देता था तो उसे पकड़ के मार डाला जाता था।

इस घटना में हम “shibboleth” शब्द को पासवर्ड ही तो कहेंगे! इसके अलावा मशहूर कहानी “अली बाबा और चालीस चोर” में डाकुओं की सोने-चांदी से भरी गुफा को खोलने के लिए व्यवहार में लाया गया वाक्य “खुल जा सिम-सिम” भी पासवर्ड का उत्कृष्ट उदाहरण है। ये कहानी भले ही काल्पनिक हो लेकिन इससे पता चलता है कि पासवर्ड जैसे विचार इंसानी दुनिया के लिए नये नहीं हैं।

कम्प्यूटिंग में पासवर्ड का उपयोग सबसे पहले 1960 के दशक में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड बेल लेबोरेटरीज की संगत समय-साझाकरण प्रणाली and यूनिक्स (Unix) सिस्टम में हुआ था। संगत समय-साझाकरण प्रणाली एक कम्प्यूटर था जिसे एक साथ कई यूजर्स के काम कर सकने के लिए बनाया गया था, जैसा कि आज मॉडर्न कम्प्यूटर लैब्स में होता है।

आज बहुत से लोग अपनी किसी न किसी जरूरत के लिए पासवर्ड का उपयोग कर रहे हैं। इसमें अपने पीसी की सुरक्षा से लेकर ईमेल्स और स्मार्टफोन्स की सिक्योरिटी शामिल है। देखा जाए तो हमारा पासवर्ड हमें रिप्रेजेंट करता है। यह उस दुनिया का ताला है, जिसे हम “डिजिटल” कहते हैं। पासवर्ड जितना अधिक यूनिक होगा, ये तुमको उतना ही सिक्योर रखेगा।

इसलिए कहा जाता है कि अपनी किसी बिल्कुल आम चीज, जैसे मनपसंद खाना, कपड़े, कोई दोस्त का नाम जैसे शब्दों को पासवर्ड नहीं बनाना चाहिए क्योंकि वे आसानी से गेस किये जा सकते हैं। वहीं अल्फान्यूमेरिक और पंक्चुएशन कैरेक्टर्स युक्त पासवर्ड स्ट्रॉन्ग होते है और इनको ऑटोमैटेड पासवर्ड गेसिंग करने वाले किसी सॉफ्टवेयर के जरिए पकड़ पाना कठिन हो जाता है।

पासवर्ड का जो स्वरूप वर्तमान में हमारे सामने है, उसका तोड़ तेजी से मॉडर्न हो रही टेक्नोलॉजी में खोज लिया गया है और पासवर्ड चाहे कितना भी मजबूत क्यों न हो, चतुर हैकर उसे तोड़ ले रहा है। यही कारण है कि अब इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बनाने वाली कंपनियाँ, बायोमैट्रिक प्रणाली पर अधिक भरोसा दिखा रही हैं। फिंगर प्रिंट सेंसर्स, फेस अनलॉक फीचर और रेटिना स्कैंनिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। बहुत संभव है कि लिखे जाने वाले पासवर्ड्स आने वाले समय में बीती बात बन जाएं।

पासवर्ड्स के बारे में कुछ रोचक तथ्य
जब लोगों को पासवर्ड में कोई संख्या जोड़नी होती है तो अधिकतर लोग इसके अंत में 1 या 2 ही जोड़ते हैं।
दो तिहाई यूजर्स अपने सभी ऑनलाइन अकाउंट्स के लिए दो पासवर्ड्स का ही यूज करते हैं।
टॉप टेन, मोस्ट यूज्ड पासवर्ड्स की लिस्ट में पाँच सालों में मामूली बदलाव आया है
चालीस प्रतिशत संस्थाएं, अपने पासवर्ड्स को वर्ड या स्प्रेडशीट डॉक्यूमेंट में स्टोर रखती हैं
password, superman, michael, dragon जैसे शब्द मोस्ट कॉमन पासवर्ड्स की लिस्ट में आते हैं, इसलिए इस तरह के पासवर्ड्स का यूज नहीं करना चाहिए।
Skyhigh Networks ने अपनी एक एनालिसिस में पाया था कि चुराए गये ग्यारह मिलियन पासवर्ड्स में से बीस पासवर्ड्स ऐसे थे जो उन ग्यारह मिलियन का 10.3% हिस्सा थे। इसका मतलब कि उन बीस पासवर्ड्स का यूज बहुत से लोगों ने किया था।
विशेषज्ञों के अनुसार brute-force cracking से बचने के लिए पासवर्ड लेंथ कम से कम 13 characters की होनी चाहिए।

 

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