वरिष्ठ लोगों की समाज में आवश्यकता

लोक का पर्याय ही समाज है। सामज की ढ़ांचा गत व्यवस्था में वृद्धजनों का स्थान प्राचीरवत है। लोक में शिवत्व का साक्षात स्वरुप यही बुजुर्गवार पीढ़ी है। यद्यपि यह पीढ़ी शारीरिक रुप से निर्बल हो सकती है किन्तू इनके पास अनुभव का अज्रस स्रोत विद्यमान होता है।युवा जहां शारीरिक एवं मानसिक रुप से सक्षम होते हैं, वहीं वरिष्ठजनों की संघर्षीय पृष्ठभूमि सहित अनुभव का संयोग सोने में सुहागा सिद्ध होता है,,,। यदि हम और हमारा समाज इन वृद्धजनों को उपेक्षित एवं तिरस्कृत करेंगे तो निश्चित, ही समाजिक तानेबाने की इमारत भर-भराकर गिर जाएगी,,,।
समाज की आर्थिक समृद्धता अपनी जगह है। वस्तुत: नवपीढ़ी इन्हें कबाब में हड्डी मानती है। इतने महत्वपूर्ण किरदार को स्वीकार के लिए इस पीढ़ी का पाचन तंत्र कमजोर है। आखिर क्या वजह जो सम्पन्न घरानों के वृद्धजनों को वृद्धाश्रमों में शरण लेने हेतु विवश होना पड़ता है। संतति इन्हें अपनी व्यैक्तिक आजादी में खलल मानती है।
समाज को लोकहित में सार्थक पहल करनी होगी। बुजुर्गों का साथ रचनात्मकता के संग सकारात्मक सिद्ध होगा।

प्रखर दीक्षित
फर्रुखाबाद

Dr. Prakhar Dixit:

जीवन परिचय

नाम= डॉ रघुनंदन प्रसाद दीक्षित ‘प्रखर”
माता= श्रीमती शांति देवी
पिता= श्री दाताराम दीक्षित
जन्म= 05 जून 1962 जनपद–फर्रूखाबाद(उ0प्र0)
विधा= कविता,कहानी, लघुकथा, गीत नवगीत तथा समसामायिक आलेख।
प्रसारण= आकाशवाणी एवं जैन टीवी चैनल से काव्य पाठ, भेंटवार्ता तथा सामायिकी का प्रसारण।
प्रकाशन = स्तरीय राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में सतत प्रकाशन।
कृतीत्व= निर्झणी(क्षणिका),एवं मन के द्वार (नवगीत)
एवं सीमा से आंगन तक(सैन्य गीत),राहें, अंतिम आग (अप्रकाश्य)
सम्मान= विद्यावाचस्पति एवं विद्यासागर(विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ भागलपुर (बिहार)सहित कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित।
व्यवसाय= 30 वर्षों तक सैन्य सेवा में सूबे.मेजर पद से सेवा उपरांत स्वतंत्र साहित्य सृजन।
सम्पर्क= 27, शांतिदाता सदन, नेकपुर चौरासी, फतेहगढ , जनपद- फर्रूखाबाद(उ0प्र0)209601
Email : Prakhard68@gmail.com
Mob= 09044393981
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