अजयश्री महिला दिवस सम्मान प्रसिद्घ कथक नृत्यांगना एवं कवयित्री मंजु श्रीवास्तव को मिला

देहरादून। महिला दिवस के अवसर में अजयश्री फाउंडेशन ने महिला दिवस बनाया। जैसे आप सभी जानते ही हैं मार्च पहले सप्ताह में देश दुनिया मे समाजिक संस्थाओ द्वारा जगह जगह कई तरह के कार्यक्रम किये जाते हैं महिलाओं के सम्मान में। इन सभी कार्यक्रमो के बीच अजयश्री फाउंडेशन देहरादून भी हर वर्ष ऐसी महिलाओं सम्मानित करता है जो किसी भी कार्य क्षेत्र में विशेष कार्य कर रही हैं। इस बार अजयश्री महिला दिवस सम्मान जानी मानी कथक नृत्यांगना कवयित्री एवं साहित्यकार मंजु श्रीवास्तव को दिया गया जो भारत के कला साहित्य संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान दे रही है। उनको ये सम्मान वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि इंदु अग्रवालजी के कर कमलों द्वारा दिया गया। इस अवसर में  मंजु श्रीवास्तव जी द्वारा अजयश्री फाउंडेशन को आर्थिक सहायता भी प्रदान की गयी । साथ ही इस अवसर में महिला कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया गया।महिला काव्य पाठ सत्र में कवयित्रीयों महिलाओ पर केंद्रित कविता एवं होली मिलन के गीत गाये । जिसमें कवयित्री एवं कहानीकार डॉ विद्या सिंह ने चाह नहीं सीता बनने की
नहीं द्रोपदी का अभिमान
मुझको मेरा स्वत्व चाहिए
लौटा दो मेरी पहचान कविता सुनाई । ,कवयित्री एवं कहानीकार डॉ विद्या सिंह ने चाह नहीं सीता बनने की
नहीं द्रोपदी का अभिमान
मुझको मेरा स्वत्व चाहिए
लौटा दो मेरी पहचान कविता सुनाई, कवयित्री शोभा पराशर ने नारी तुम शक्ति हो, नारी तुम शक्ति हो।
सती साध्वी सीता हो, मन की अभिव्यक्ति हो।।
हैं महान भारत की नारी अद्भुत शान तुम्हारी।
ज्ञान और विज्ञान सभी में महिमा तेरी न्यारी।। कविता सुनाई साथ ही होली मिलन के अवसर में होली गीत भी सुनाया मैं फागुन के रंग में रंग कर तुम्हें होली खिलाऊँगी।
तिलक चन्दन लगाकर के तुम्हें अंग से लगाऊँगी।। , कवयित्री मंजुु श्रीवास्तव ने “बेड़ियां”-
तोड़ के बंधन आज उडूं मैं ,मुझे मिले मेरा संसार।
कोई बेड़ी रोक सके ना , मुझे मिले मेरा प्रस्तार। कविता सुनाई।, कवयित्री~कविता बिष्ट ने जीवन कठिन है मेरा, दो प्यार मुझको
क्यों देते हो तुम,ज़ख़्म हज़ार मुझको कविता सुनाई कवयित्रि मणिका अग्रवाल” मणि” ने आज स्वयं इतिहास लिखूँ मैं,

बाँध पोटली हिम्मत वाली,
त्याग निराशा, आस लिखूँ मैं,
आँसू रख ख़ुशियों के हिस्से,
अंतर्मन की प्यास लिखूँ मैं। कविता सुनाई। कवयित्री विजयश्री वन्दिता ने मैं भवानी, मैं ही दुर्गा ,फिर भी मैं नारी रही।
जब भी चाहा तूने भोगा ,भोग को सारी रही। कविता सुनाई

सभी कवयित्रीयों महिलाओं पर केंद्रित काव्य पाठ  किया साथ ही होली गीत भी गाकर माहौल रंगीला कर दिया। महिला दिवस के साथ साथ होली मिलन कार्यक्रम आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार इंदू अग्रवाल जी ने की । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंजू श्रीवास्तव व
विशिष्ट अतिथि अनिल अग्रवाल जी श्री कांतश्री जी व वरिष्ठ कवियत्री व कहानीकार विधा सिंह जी रही । कार्यक्रम मे जानी मानी कवियत्री शोभा पाराशर जी, महिमाश्री जी व कविता बिष्ट जी भी उपस्थित रही । इस अवसर पर वरिष्ठ कवियत्री इंदु अग्रवाल जी की शादी की 50वी सालगिराह भी मनाई गई साथ ही रायपुर बस्ती के बच्चों द्वारा सरस्वती वंदना और सांस्कृतिक कार्यक्रम किये गए। अनिल अग्रवाल जी द्वारा बच्चों को पुरुस्कार देकर सम्मानित भी किया गया। अनिल अग्रवाल जी ने बस्ती के बच्चों को आर्थिक सहायता भी दी । कार्यक्रम का संचालन मणिका मणि अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम आयोजक भूमिका में रही विजयश्री वन्दिता। इस अवसर में अजयश्री के प्रदीप चौहान , देवेश्वरी नयाल भी मौजूद रही। अंत मे विजयश्री वन्दिता ने कहा इस तरह आयोजन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं एवं मातृशक्ति का सम्मान करना है । कार्यक्रम के दूसरे सत्र में मंजु  श्रीवास्तव “मन” की पुस्तक कोपलें का हुआ विमोचन। 5 मार्च को अजयश्री फाउंडेशन द्वारा महिला दिवस सम्मान 2022 मंजू श्रीवास्तव ‘मन’ को सम्मानित किया गया। इस अवसर में मंजू श्रीवास्तव ‘मन’की पुस्तक कोंपले का विमोचन भी किया गया। *कोपलें* एक संग्रह पुस्तिका है जिसमें मंजू श्रीवास्तव ‘मन’ ने लघुकथा, काव्य एवं कह-मुकरी संग्रहित की है। इस तरह यह संग्रह, साहित्य में एक नवीन प्रयोग के तौर में देखा जा सकता जहां एक ही रचनाकार रचित तीन विधाओं को पाठको को पढ़ने का सुख मिलेगा। इस पुस्तक का प्रकाशन समय साक्ष्य देहरादून ने किया है।

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