ईरान युद्ध से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव, भारत सहित कई देशों में संकट बढ़ने का खतरा

ईरान में जारी युद्ध के फिलहाल कोई समाधान नहीं दिखाई दे रहे हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रुकने के कारण पश्चिम एशिया से तेल का निर्यात घट गया है, जिसके परिणामस्वरूप पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक जैसी जरूरी वस्तुओं की किल्लत बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है। मार्च में पश्चिम एशिया से तेल निर्यात में 63 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक सप्लाई काफी कम हो गई है।

हालांकि, कुछ निर्यात अभी भी जारी हैं। सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह से पाइपलाइन के जरिए तेल भेजा जा रहा है, लेकिन यह पूरी तरह से गिरावट की भरपाई नहीं कर पा रहा है। इस स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता और बढ़ा दी है, और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए चिंता बढ़ा दी है।

विशेष जानकारी:

* मार्च में पश्चिम एशिया से तेल निर्यात में 63% गिरावट।
* होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित।
* तेल, गैस और उर्वरक की आपूर्ति पर दबाव।

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