अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला: ट्रंप ने टैरिफ़ लगाते समय अधिकारों का किया अतिक्रमण
वॉशिंगटन।
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 6–3 के बहुमत से दिए गए एक अहम फ़ैसले में कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल वैश्विक स्तर पर टैरिफ़ लगाते समय अपने अधिकारों की सीमा पार की थी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि 1977 के क़ानून इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति लगभग सभी देशों से आयात होने वाले सामान पर व्यापक टैरिफ़ नहीं लगा सकते। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, यह क़ानून आपात स्थितियों में सीमित आर्थिक कदम उठाने की अनुमति देता है, न कि वैश्विक व्यापार पर बड़े पैमाने पर कर लगाने की।
130 अरब डॉलर के रिफ़ंड की संभावना
इस फ़ैसले के बाद टैरिफ़ के ज़रिए वसूले गए क़रीब 130 अरब डॉलर के रिफ़ंड की संभावना भी सामने आई है। हालांकि, अदालत ने कहा कि रिफ़ंड से जुड़ा अंतिम फ़ैसला आगे होने वाली अलग कानूनी कार्यवाहियों में तय किया जाएगा।
वैकल्पिक क़ानून के तहत नया टैरिफ़
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत एक नई घोषणा पर हस्ताक्षर किए। इस प्रावधान के तहत उन्हें सभी देशों के सामान पर अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत टैरिफ़ लगाने की अनुमति मिलती है।
दूरगामी असर
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक़, यह फ़ैसला राष्ट्रपति की व्यापारिक और आर्थिक आपात शक्तियों पर अहम सीमा तय करता है। साथ ही, इससे भविष्य में अमेरिका की व्यापार नीति और कांग्रेस की भूमिका को लेकर नई बहस तेज़ हो सकती है।

