May 29, 2024

Ajayshri Times

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4 अरब के पेड़ का मुआवजा

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के रास्ते में 10 लाख पेड़, क्या रेलवे देगा 400 करोड़ मुआवज़ा?
: ऋषिकेश से कर्णप्रयाग के बीच बिछाई जा रही नई रेल लाइन को लेकर नया पेंच सामने आ गया है.
: ऋषिकेश से कर्णप्रयाग के बीच बिछाई जा रही नई रेल लाइन को लेकर नया पेंच सामने आ गया है.
नौकरी छोड़कर एक अफसर ने दिन रात पसीना बहाया. 34 लोगों की सिंचित ज़मीन किराये पर ली और वहां लाखों फलदार पेड़ों का बगीचा नहीं, बल्कि जंगल खड़ा कर दिया. रेलवे ने जब इन पेड़ों की गिनती की और सर्वे किया तो उसके पसीने छूट गए. नियम के अनुसार अगर मुआवज़ा देने की नौबत आई तो रेलवे को 400 करोड़ इस पूर्व अफसर को देने होंगे. मामला ट्रिब्यूनल (Tribunal ) यानी विशेष न्‍यायालय जो विशेष प्रकार के विवाद निपटाता है; अधिकरण न्‍यायाधिकरण को ट्रिब्यूनल कहते हैं।

लेकिन सुनवाई न हो पाने के चलते अटका पड़ा है. देखिए इस रोचक मामले में हाई कोर्ट (Uttarakhand High Court) से रेलवे को कैसे झटका लग चुका है.

देहरादून. जो ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन श्रेय को लेकर विधानसभा चुनाव में चर्चा में रही, अब एक भारी भरकम मुआवज़े के केस को लेकर सुर्खियों में है. यह केस बागवानी करने वाले एक पूर्व कृषि अफसर और रेलवे के बीच चल रहा है. अगर रेलवे के हक में यह केस गया तो रेलवे को करीब 58 करोड़ रुपये का मुआवज़ा देना पड़ सकता है, लेकिन कहीं यह केस बागवानी करने वाले के हक में चला गया, तो रेलवे को 400 करोड़ रुपये तक का मुआवज़ा अदा करना होगा. ऐसा हुआ तो देश में संभवत: व्यक्तिगत मुआवज़े की यह सबसे बड़ी रकम हो सकती है. फिलहाल मामला हाईकोर्ट के बाद ट्रिब्यूनल में पेंडिंग है.

126 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन से जुड़े इस मामले को लेकर 2013 में जब यहां सर्वे का काम हुआ, तो तय हुआ कि मलेथा में स्टेशन बनेगा. इसकी सीमा में अल्मोड़ा से एक पूर्व ज़िला कृषि अफसर अनिल जोशी द्वारा किराये पर ली गई ज़मीन भी आई. इस ज़मीन पर जोशी ने फलों के लाखों पौधे लगाए थे, जो अब पेड़ बन चुके हैं. 2017 में जब रेलवे ने इन पेड़ों के मुआवज़े का आकलन किया, तो गणना में शहतूत के पेड़ 7,14,240 मिले और संतरे, आम सहित अन्य फलों के पेड़ 2,63,980 पाए गए. अब इन पेड़ों के मुआवज़े को लेकर बात अटकी हुई है.

मुआवज़े के नियमों से छूटे रेलवे के पसीने
नियम यह है कि एक मदर प्लांट पर 2196 रुपये मुआवज़ा संपत्ति के हकदार को दिया जाए. इस हिसाब से करीब 10 लाख पेड़ों का मुआवज़ा 400 करोड़ रुपये बनता है. इस रकम से रेलवे के पसीने छूटे तो उसने जोशी को बुलाकर कहा कि शहतूत को फलदार पेड़ नहीं माना जा सकता और ये बड़ी संख्या में भी हैं, इसलिए ऐसे पेड़ों के लिए 4.50 रुपये प्रति पेड़ के हिसाब से भुगतान होगा. इसके बाद मामला हाईकोर्ट में चला गया.

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