जीवन के 92 बसंत देखने वाली लता मंगेशकर के गीतों बसंत सदा बना रहेगा। बसंत ऋतु आगमन के साथ लता जी जीवन बसन्त तो थम गया । पर उनका स्वर संगीत गीत उनके बसन्ती जीवन को बढ़ाते ही रहेंगे

परफेक्ट को परफेक्ट करना ही इन्शान को लता मंगेशकर बनाती है


लता मंगेशकर होना ही
अपने आप मे एक रतन है
एक सम्मान नन एक वरदान है
पर उनसे एक बार इंटरव्यू में
किसी शख्स ने पूछा
आप अगले जन्म मे
क्या होना या बनना चाहेगी
लता मंगेशकर का अदभुत जवाब
और दर्शन दिया उस बात का
मै अगले जन्म कुछ भी हो जाऊ
लता मंगेशकर नहीं होना चाहुगी
ये उनकी महानता से
भरा भोला जवाब
उनको सच मे सरस्वती बनाता है
वो उस दर्द
और टिस को व्यक्त करती
है ग्लैमर सब कुछ नहीं है
सब कुछ पाने बाद भी
एक जीवन कम पड़ जाता है
अनछुई लालसाओं के लिये
किस तरह तेरह साल लड़की पर
परिवार पालने की जिम्मेदारी आती है
उसका स्ट्रगल कि अनगिनत किस्से
और परफेक्ट को परफेक्ट करना ही
इन्शान को लता मंगेशकर बनाती है


रचना…………….शैलेन्द्र जोशी

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