June 16, 2024

Ajayshri Times

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उत्तराखण्ड आंदोलन ही नहीं अपितु कई अन्य जन आंदोलनों में अपनी भरसक कोशिश के साथ लड़ा-भिड़ा यह नाम है – बाबा मथुरा प्रसाद बमराड़ा!

उत्तराखण्ड आंदोलन ही नहीं अपितु कई अन्य जन आंदोलनों में अपनी भरसक कोशिश के साथ लड़ा-भिड़ा यह नाम है – बाबा मथुरा प्रसाद बमराड़ा!

विशिष्ट शैलीकार व स्वतंत्र पत्रकार भ्राता ललित कोठियाल
का भगीरथ प्रयास
‘संघर्षनामा एक राज्य आंदोलनकारी का’

धारा 144 को लाघंना नियमों का उल्लंघन है। जहां सभी आंदोलनकारियों ने विनीत भाव से धारा 144 के उल्लंघन के लिए निर्धारित रस्से को मात्र छूना ही उचित समझा, वहीं उन्हीं आंदोलनकारियों के बीच एक आंदोलनकारी ऐसा भी था जिसको धारा 144 के उंलघन का यह तरीका रास नहीं आया। उसने केवल रस्से को छुआ ही नहीं बल्कि रस्से के पार कूदकर गंतव्य की ओर दौड़ लगा दि। नियम कानून तोड़ने की इस धृष्टता पर कानून के डंडे बरसने स्वाभाविक थे। लेकिन डंडे खाने के वावजूद भी वह आंदोलनकारी आश्वस्त था कि वास्तव में उसने धारा 144 का उल्लंघन किया है। क्योंकि नियम-कायदा तोड़ना हो तो लगना भी चाहिए कि नियम-कायदा टूटा है।

उत्तराखण्ड आंदोलन ही नहीं अपितु कई अन्य जन आंदोलनों में अपनी भरसक कोशिश के साथ लड़ा-भिड़ा यह नाम है – बाबा मथुरा प्रसाद बमराड़ा! बिडम्बना ही है कि जहां तमाम आंदोलनकारियों की झोली में कुछ न कुछ पहुंचा वहीं बाबा आज भी फाकापस्ती में दिन गुजार रहे हैं। न ठीकाना न खाना।

विशिष्ट शैलीकार व स्वतंत्र पत्रकार भ्राता ललित कोठियाल ने बाबा मथुरा प्रसाद बमराड़ा के व्यक्तित्व पर पत्र-पत्रिकाओं में अनेकों आलेख लिखे हैं । लेकिन इस बार भ्राता ललित कोठियाल ने बाबा के व्यक्तित्व एंव कृतित्व पर एक विस्तृत शोधपरक खाका पुस्तकाकार रूप में ‘संघर्षनामा एक राज्य आंदोलनकारी का’ के रूप में पाठकों के सम्मुख रखा है। पुस्तक में बाबा को इन्साफ दिलाने के लिए न केवल यथेष्ठ सामाग्री है बल्कि पठनीय एंव संग्रहणीय है।

बिना किसी आर्थिक सहायता के इस भगीरथ प्रयत्न को पूरा करने के लिए कोठियाल जी साधुवाद के पात्र हैं !

आलेख :नरेंद्र कठैत फेसबुक वॉल 11 जुलाई 2016 को प्रकाशित

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