तेरो मछोई गाड़ बगीगे, चदरी यो चदरी फवां फवां 
तेरो मछोई गाड़ बगीगे, चदरी यो चदरी फवां फवां जैसे लोकप्रिय गीत गढगौरव नरेंद्र सिंह नेगी के कम्पोजिशन और गायिकी में यह गीत नए कलेवर में औऱ लोकप्रिय हुए। जो आज लोकगीत की तरह लोकप्रिय हो गए हैं। पर यह गढ़वाली गीत को सहेजने लिखने वाले गीतकार मथुरा प्रसाद डोभाल रहे जिनके गढवाली गीत संगीत आकाशवाणी से प्रसारित होते रहे वो लोकवाद्यों को बजाने में भी सिद्धहस्त थे। उनके गीत पौड़ी रामलीला में भी लोकप्रिय रहे हैं साथ बद्री केदार दर्शन जैसे गढवाली गीत नरेंद्र सिंह नेगी के स्वरों में लोकप्रिय रहे। मथुरा प्रसाद डोभाल पचास के दशक से पूर्व गढवाली गीत लेखन में सक्रिय 11 फरवरी 1950 में देहरादून प्रवास के दौरान मथुरा प्रसाद डोभाल जी द्वारा सुन्दर हस्तलिखित डायरी गढवाली लोकगीतों की एक झलक संकलन से ही तेरो मछोई गाड़ बगीगे, चदरी यो चदरी फवां फवां जैसे गढवाली गीत निकले जो दशकों बाद गढवाली संगीत बाजार में पहुंचे और लोकप्रिय हुए पर इन गीतों संवर्धन सरक्षण वाले गीतकार मथुरा प्रयाद डोभाल इन गीतों के स्रोत रहे यह बात लोक में पहुंची नही।

