पुलवामा शहादत/ कविता :पांडेय चिदानंद “चिद्रूप
. पुलवामा शहादत करना माफ तू मुझको प्रिये, मैं वादा पूरा कर न सका।प्रेम दिवस पर आ कर, तुझको अंको में भर न सका।।निकला तो था आने को पर, कुछ…
सामाजिक सरोकारों की एक पहल
. पुलवामा शहादत करना माफ तू मुझको प्रिये, मैं वादा पूरा कर न सका।प्रेम दिवस पर आ कर, तुझको अंको में भर न सका।।निकला तो था आने को पर, कुछ…