कहानी एक अम्मा की कविता “महिमा बंसल”
*कहानी एक अम्मा की* मायूस सा चेहरा लिए, झुर्रियों का पहरा लिए, एकांत मैं बैठी औरत, जो परिवार से निकाल दी गई, सोचो जरा कितना असहाय होगा हृदय उसका, जो…
सामाजिक सरोकारों की एक पहल
*कहानी एक अम्मा की* मायूस सा चेहरा लिए, झुर्रियों का पहरा लिए, एकांत मैं बैठी औरत, जो परिवार से निकाल दी गई, सोचो जरा कितना असहाय होगा हृदय उसका, जो…