उर्दू भाषा के प्रतिष्ठित शायर इक़बाल ‘आज़र’ की गजल
उर्दू भाषा के प्रतिष्ठित शायर इक़बाल ‘आज़र’ की गजल *ग़ज़ल* ——– बिलक के जब कभी हम ऐड़ियां रगड़ते हैं तो रेगज़ारों में भी चश्मे फूट पड़ते हैं हमें मिला है…
सामाजिक सरोकारों की एक पहल
उर्दू भाषा के प्रतिष्ठित शायर इक़बाल ‘आज़र’ की गजल *ग़ज़ल* ——– बिलक के जब कभी हम ऐड़ियां रगड़ते हैं तो रेगज़ारों में भी चश्मे फूट पड़ते हैं हमें मिला है…