श्रीहरिकोटा से फिर रचा इतिहास: ISRO के ‘बाहुबली’ और प्राइवेट रॉकेट्स ने भरी अंतरिक्ष में ऊंची उड़ान

श्रीहरिकोटा: भारत का मुख्य स्पेसपोर्ट ‘सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र’ (SDSC-SHAR) एक बार फिर वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में अपनी ताकत का लोहा मनवा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नेतृत्व में श्रीहरिकोटा से हाल ही में कई बड़े और ऐतिहासिक मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है, जिसने भारत को ग्लोबल कमर्शियल लॉन्चिंग का सबसे भरोसेमंद केंद्र बना दिया है।
इस कड़ी में भारत की निजी स्पेस कंपनी ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ का विक्रम-1 (Vikram-1) रॉकेट श्रीहरिकोटा से अपने पहले कक्षीय मिशन (Orbital Mission) के लिए पूरी तरह तैयार है, जो भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्रांति का नया अध्याय है। इसके साथ ही इसरो के सबसे भारी और शक्तिशाली रॉकेट LVM3 ने अमेरिकी संचार उपग्रहों ‘ब्ल्यूबर्ड ब्लॉक-2’ को उनकी सटीक कक्षा में स्थापित किया, जो अब तक का सबसे भारी कमर्शियल पेलोड लॉन्च था। भारत की रक्षा और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए PSLV-C62 मिशन के जरिए एडवांस डिफेंस सैटेलाइट ‘अन्वेषा’ सहित 16 उपग्रहों को भी सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा गया है। वहीं, दुनिया का सबसे महंगा और एडवांस अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ‘निसार’ (NISAR) भी श्रीहरिकोटा से लॉन्च के लिए तैयार है, जो पृथ्वी की बदलती परतों पर नजर रखेगा।
वैज्ञानिकों के अनुसार, भूमध्य रेखा (Equator) के नजदीक होने और पूर्वी तट पर स्थित होने के कारण श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग के समय रॉकेट को पृथ्वी की गति का प्राकृतिक फायदा मिलता है, जिससे भारी मात्रा में ईंधन की बचत होती है और खराबी की स्थिति में अवशेष सीधे बंगाल की खाड़ी में गिरते हैं। इस रोमांच को लाइव देखने के लिए इसरो ने वहाँ एक शानदार ‘लॉन्च व्यू गैलरी’ भी बनाई है, जहाँ आम जनता आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण कराकर हजारों लोगों के साथ लाइव रॉकेट लॉन्च का गवाह बन सकती है।
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